फुली

 


फुली

सरण राई

लॉकर में रखे गहनों में से फुली को देखकर दिल चीर सा जाता है।
फुली मेरी पत्नी की नाक में जीवनभर रही थी। शादी से पहले, शादी के बाद, और जीवन के अंतिम समय तक भी।
दूसरे गहने कभी गिरवी रखे गए। मुश्किलें टाली गईं। कई गहने तो ब्याज नहीं चुका पाने के कारण हाथ से चले भी गए। लेकिन फुली हमेशा उनकी नाक में रही।

अन्य गहने कभी गिरवी रखे गए, कभी मुश्किलें टाली गईं। कुछ गहने ब्याज न चुका पाने के कारण बिक भी गए। लेकिन फुली हमेशा उनकी नाक में ही रही।

जब वह गंभीर रूप से बीमार हुईं, आई.सी.यू. में फुली के बिना नाक के छिद्र में इरिगेशन पाइप डालकर उन्हें खाना खिलाया गया। बेहोशी की हालत में भी उन्होंने उस पाइप को खींचकर फेंक दिया। उस समय फुली हटाकर पाइप डालने की कोशिश की गई, लेकिन फुली हटाई नहीं जा सकी। और उनकी मृत्यु तक वह फुली उनकी नाक में ही रही।

मैंने उनसे वादा किया था कि उस फुली की जगह हीरे की फुली बनवाकर दूंगा। लेकिन वह वादा पूरा नहीं कर सका। उन्होंने भी कभी इसकी मांग नहीं की। और वह फुली हमेशा उनकी नाक में ही रही।

फुली! जैसे उनकी नाक में वह फुली, वैसे ही मैं और वह एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। वह मुझे छोड़ना नहीं चाहती थीं। मैं भी उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था। लेकिन हमें अलग होना पड़ा...

उनकी मृत्यु के बाद, वह फुली उनकी नाक से आसानी से निकाल ली गई। आज भी जब उस फुली को देखता हूं, वह उनकी यादों का प्रतीक बनकर सामने खड़ी हो जाती है। आंखें नम हो जाती हैं। दिल चीर सा जाता है।
लेकिन... फुली की तरह ही, अंत में सब कुछ छोड़कर जाना होता है। वह सब कुछ छोड़कर चली गईं, केवल यादें छोड़कर...। वह यादें, जिन्हें ताजा करती रहती है एक छोटी सी फुली...!

 


 

Comments

Popular posts from this blog

अंशभाग

स्वांग

मुकुट