लघुकथा: चमत्कारी कुटी
लघुकथा: चमत्कारी कुटी लेखक: सरण राई चमत्कारी कुटी से बहुत ऊपर एक ऊंचे स्थान पर, मेरी तरह तमाशा देखने आए बहुत से लोग हैं। सभी की निगाहें चमत्कारी कुटी पर ही केंद्रित हैं। चमत्कारी कुटी बीच में स्थित है। यह बहुत बड़ी नहीं है, मुश्किल से पचास लोगों के बैठने लायक होगी। लेकिन इसकी सजावट इतनी चमकदार है कि आंखें चकाचौंध हो जाती हैं। सुनहरी दीवारों पर जड़े हुए बेशकीमती हीरे-जवाहरात और मणियां चमचमाते हैं। जितना देखते जाओ, उतना ही देखने का मन करता है। यह कब बनी, किसी को नहीं पता। इसके चारों तरफ एक शहर बसा हुआ है, जिसकी अपनी विशेषताएं हैं। महंगे होटल, बेशकीमती गहनों और कपड़ों की दुकानें, और फोटो व वीडियो स्टूडियो चमत्कारी कुटी के आस-पास स्थित हैं। चमत्कारी कुटी, एक बड़ी रकम के बदले, 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को एक घंटे के लिए जवान पुरुष या महिला बना देती है। दुनिया भर के हजारों अमीर लोग यहां आकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। चमत्कारी कुटी का यह चमत्कार देखने आने वाले पर्यटकों और अपनी बारी का इंतजार करने वाले बुजुर्गों की भीड़ से इस शहर के लोगों की आमदनी में बढ़ोतरी ही होती जा रह...