-कथा ब्लैकबोर्ड, चॉक और डस्टर
कथा ब्लैकबोर्ड, चॉक और डस्टर सरण राई लिखना, मिटाना, चॉक की धूल में डूब जाना। ब्लैकबोर्ड पर लिखते-लिखते उंगलियाँ खुद चॉक बन जाती हैं। जैसे सिर पर बर्फ़ गिर रही हो, वैसे ही चॉक की धूल बालों में जम जाती है। चेहरे पर धूल यूँ चिपक जाती है जैसे फाल्गुन की आँधी में उड़ी मिट्टी। धूल से ढके चेहरे में एक जोड़ी आँखें, कक्षा के चारों ओर घूमती हैं, फिर ब्लैकबोर्ड पर ठहर जाती हैं। लिखे हुए अक्षर मिट जाते हैं। एक हाथ में डस्टर, दूसरे में चॉक। वह चिल्लाता है—और ज़ोर से, और ज़ोर से चिल्लाता है। यह संसार है, एक छोटा-सा संसार जो हर किसी का होता है। इसे मधुर, रमणीय और भव्य बनाने की कल्पना हर कोई करता है। बर्फ़ पिघल जाती है, पर जैसे हिमालय से बर्फ़ कभी खाली नहीं होती, वैसे ही जीवन कल्पनाशून्य नहीं हो सकता। बर्फ़ का पानी बनना ही होता है। जीवन की सुंदरता यादों में है—यादें हमेशा जीवित रहती हैं। वह व्यक्ति सबसे महान है, जिसे अधिक लोग याद करते हैं। ब्लैकबोर्ड पर लिखे सुंदर अक्षर मिट जाते हैं। कौन सोच सकता है—कुछ देर पहले वहीँ सुंदर अक्षर थे। चॉक भी जीवन जैसा है। पूरी चॉक ब्लैकबोर्ड...