छोटा घटना: बड़ा प्रभाव
छोटा घटना: बड़ा प्रभाव
सरण राइ
बैंक में पैसे निकालने
की लाइन में खड़ा हूं। दो सुंदर युवतियां मेरे पीछे खड़ी हैं। वे धीमे-धीमे
बातें कर रही हैं। मुझे ऐसा लगा कि शायद वे मेरे बारे में कुछ कह रही हैं,
तो मैंने पूछा, "क्या कहा आपने?"
उनके कहे को न समझ पाने पर मैंने फिर
पूछा। उनमें से एक सुंदर युवती मेरे कान के पास आकर धीरे से कहती है,
"स्वेटर का डिज़ाइन देख, यही अपनी दोस्त से कहा।"
मैंने जो स्वेटर पहन रखा है, वह मेरी दिवंगत पत्नी ने अपने हाथों से बुना था। उस पर बने डिज़ाइन बहुत सुंदर हैं। मेरा मन खुशी से भर जाता है और मुझे अपनी पत्नी की कला पर गर्व महसूस होता है।
लेकिन अचानक, मेरा मन भारी हो जाता है।
वह स्वेटर बुनने वाली मेरी पत्नी अब कहां है... मैंने उन्हें बचाने के लिए
सब कुछ किया, लेकिन उनकी उम्र उनके बस में नहीं थी। वे चली गईं। लेकिन उनका
प्रेम उनके बस में था, जिसे वे दे गईं।
उनके प्रेम और मेहनत से बुना स्वेटर मैं आज भी पहनता हूं।
उन्हें जीने की कितनी चाह थी, लेकिन वे नहीं रहीं।
तभी
मुझे अपना 16 वर्षीय भतीजा याद आता है, जिसने हाल ही में 10वीं कक्षा में
पढ़ते हुए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मेरा मन विचलित हो जाता है। किसी
को लंबी उम्र मिलती है, तो किसी को कुछ ही दिन जीने का अवसर...
मैं
सोचता हूं कि छोटी-सी परेशानी के कारण कोई आत्महत्या नहीं करता। मैंने खुद
जीवनभर अनगिनत दुख और कठिनाइयों का सामना किया है। मैं अब इन छोटी-बड़ी
परेशानियों को सहने लायक परिपक्व हो चुका हूं। लेकिन कभी-कभी, मुझे भी कुछ
दुख सहना बहुत कठिन लगता है।
किशोरावस्था में, छोटी सी परेशानी भी बड़ी लगती होगी।
दुख... दुख! मेरी आंखें भर आती हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर आंसू बहाना उचित नहीं।

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