अंशभाग
अंशभाग
दार्जिलिंग के प्रसिद्ध साहित्यकार — 85 वर्षीय पति और 81 वर्षीया पत्नी के प्रेमिल जोड़े को देखकर हम दंपति भी यही सोचते थे, “काश, हम भी उस उम्र तक साथ जी पाते।”
लेकिन समय के साथ, अब 69 वर्ष की आयु में मैं अपनी 64 वर्षीय पत्नी — जिसे बार-बार हेमोडायलिसिस कराना पड़ता है — को अस्पताल ले जाकर उसकी सेवा और देखभाल करता रहता हूँ।
अपने हिस्से में आई इस जीवन की परिस्थिति से असंतुष्ट होकर, मैं अपने पास एक 30 वर्षीय पति को देखता हूँ जो अपनी 24 वर्षीय पत्नी की देखभाल कर रहा है — जिसे भी लगातार हेमोडायलिसिस करानी पड़ती है।
यह देखकर मेरा मन शांत हो जाता है। मैं सोचता हूँ —
"मेरे हिस्से में आई ज़िन्दगी तो उसकी ज़िन्दगी से बेहतर ही है।"
हर किसी के हिस्से में उसकी अपनी ज़िन्दगी होती है…!
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