मुकुट
मुकुट
सरण राइ
वह असफल हो गया और आर्थिक रूप से परेशान हो गया। नौकरी, व्यापार, खेती कुछ भी नहीं था। भूखे मरने की नौबत आ गई, तो उसने एक तरकीब निकाली—एक मुकुट बनाया और सोचा कि इसे समाज के सबसे बड़े व्यक्ति को सम्मान के तौर पर पहनाएगा।
"गणतंत्र के युग में मुकुट का क्या मतलब?" लोगों ने कहा।
"यह राजा बनाने के लिए मुकुट पहनाने की बात नहीं है, बल्कि यह सबसे बड़े व्यक्ति को सम्मान देने का अच्छा तरीका है," उसने कहा।
मुकुट का नाम सुनते ही लोगों को लगने लगा कि यह तो महंगा होगा। अपनी प्रतिष्ठा न चली जाए, इस डर से उसने सबसे काफी चंदा जुटाया। नेता, उद्योगपति, व्यापारी, साहित्यकार, समाजसेवी और अन्य बड़े लोग खुद को उस इलाके का सबसे बड़ा व्यक्ति समझते थे। वे सोचते थे कि यह मुकुट उन्हें ही मिलेगा। इसलिए, उन्होंने उसकी योजना का समर्थन किया और मुकुट बनाने के लिए उसकी खूब मदद की।
"अगर मुकुट मिल गया, तो चुनाव जीतना आसान होगा," नेता सोचते थे।
"इससे बड़ा आदमी बन जाऊंगा," अन्य सोचते थे।
बहुत बड़ी धनराशि इकट्ठी हो गई। देखते ही देखते वह अमीर बन गया। उसने कुल रकम का सौवां हिस्सा खर्च करके सोने, चांदी और रत्नों से जड़ा हुआ मुकुट बनाया।
मुकुट पहनाने के लिए भव्य समारोह का आयोजन किया गया। सभी बड़े लोग सोच रहे थे कि यह मुकुट उन्हें ही मिलेगा, इसलिए किसी ने विरोध नहीं किया। सभी बड़े लोगों ने कार्यक्रम में बड़े-बड़े भाषण दिए और शुभकामनाएं दीं। आखिरकार मुकुट पहनाने का समय आया।
वह उठा, मुकुट को सबको दिखाया और खुद ही पहन लिया। उसकी पत्नी, रिश्तेदार और पालतू जानवरों ने ताली बजाई। विरोध करने के लिए नेता उठे, लेकिन उन्होंने अपने पालतुओं को उसकी ओर झुका पाया। कुछ पालतू तो उसने पहले ही खरीद रखे थे। उसके निजी सुरक्षाकर्मियों का बड़ा समूह देखकर खुद को बड़ा समझने वाले लोग चुप हो गए।
मुकुट पहनकर वह उस समाज का सबसे सम्मानित और बड़ा व्यक्ति बन गया।
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