(लघुलेख) आख्यान

 

(लघुलेख)

आख्यान

 
सरण राई

बीते समय के आख्यान आज के धार्मिक शास्त्र बन चुके हैं। आधुनिक कहे जाने वाले लोगों का दिमाग आज भी भगवान, राक्षस, स्वर्ग, नरक, पाप और पुण्य जैसी धारणाओं से भरा हुआ है। जैसे बीते समय के आख्यान धार्मिक शास्त्र बन गए, वैसे ही आज के आख्यान भविष्य में 'मानव जीवन संचालन के नीतिशास्त्र' बन सकते हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि बड़े-बड़े अस्पतालों में भगवान की तस्वीरें टंगी होती हैं। आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से मानव शरीर का अध्ययन कर उपचार करने वाले लोग भी बीते समय के आख्यानों से अत्यधिक प्रभावित दिखाई देते हैं, या फिर अपनी त्रुटिपूर्ण चिकित्सा और उपचार में की गई गलतियों को छिपाने के लिए ईश्वर का सहारा लेते हैं।

जिन लोगों ने अधिक शिक्षा प्राप्त की है, वे आख्यान और यथार्थ को अलग करने की इच्छा ही नहीं रखते। वे भ्रमों के और भी अधिक अंध समर्थनकर्ता और संरक्षक बनते जा रहे हैं, जो संकीर्ण स्वार्थों से प्रेरित होते हैं।

जो भी हो, जैसे बीते समय के आख्यानकार आज के जीवन को नियंत्रित करने में पूरी तरह सफल हुए, वैसे ही आज के आख्यानकारों को भी इस प्रकार लिखना चाहिए कि वे भविष्य के मानव जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर सकें!


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