बूढ़ा पौधा

 

बूढ़ा पौधा
(७८ वर्ष की एकाकी जीवन यात्रा— जब कार्य क्षमता घटती है, सम्मान घटता है, और अपमान की अनुभूति होती है— उन्हीं भावनाओं की प्रतिध्वनि यह कविता है। मेरे समकालीन मित्रों और अपने उत्साह, प्रेरणा और मनोबल के लिए।)

फूल खिलना छोड़ चुका बूढ़ा पौधा—
क्यों कोई उसकी देखभाल करे?
उसे उखाड़कर फेंक दिया गया।

पर एक सच्चे पारखी ने
फिर से उस पौधा को रोप दिया।
जड़ों से छोटे पौधे निकले,
वे पौधे बढ़े और खिले—
सुंदर फूलों में।

मनमोहक रंगों से ढका हुआ सौंदर्य,
एक रमणीय, शांत वातावरण।
यह देखकर—
जिस स्वार्थी ने उसे फेंका था, वह दुखी हुआ,
और वह जीवन-पारखी—
अपने अंतरमन की गहराई से—
बहुत प्रसन्न हुआ। 🌹

Comments

Popular posts from this blog

मुकुट

आसान

अंशभाग